जाने-माने लेखक खुशवंतसिंह का विचार है कि कांगेस महासचिव राहुल गाँधी अपने दिवंगत पिता राजीव गाँधी से ज्यादा प्रतिभाशाली हैं। उनका कहना है कि दरअसल राजीव गाँधी वास्तव में अच्छे नेता नहीं थे, बल्कि एक ऐसे बॉय स्काउट थे जिनके पास बहुत सारे अच्छे विचार तो थे लेकिन ये विचार असाधारण हो, ऐसा नहीं था।सिंह ने एक नेता के तौर पर राजीव गाँधी और राहुल गाँधी की तुलना अपनी पुस्तक ‘एबसोल्यूट खुशवंत:द लो डाउन ऑन लाइफ, डेथ एंड मोस्ट थिंग्स इन बिटवीन’ में की है। खुशवंत ने यह किताब स्तम्भकार हमरा कुरैशी के साथ मिलकर लिखी है।
उन्होंने लिखा है कि राहुल के पास दूरदर्शिता है जो कि काफी मायने रखती है। मैं उनसे प्रभावित हूँ, जिस तरह से वह खुद को संचालित करते हैं, उससे भी मैं प्रभावित हूँ। वह सही दृष्टिकोण रखते हैं।
खुशवंत ने लिखा है कि उनकी सोच सही है। वयोवृद्ध सिंह ने राहुल की इस बात को लेकर प्रशंसा की है कि उन्होंने मायावती और शिव सेना के गढ़ में दलितों के साथ बैठकर और खाना खाकर देश की शर्मनाक वास्तविकता को उजागर किया।
सिंह ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि राहुल ने मायावती को उन्हीं के गढ़ में मात दी। ऐसा करना किसी बहादुरी से कम नहीं। उन्होंने साबित कर दिया कि वह किसी जाति वर्ग को नहीं मानते और न ही इस पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं। वह अमेठी में दलित के साथ ठहरे और उनके साथ भोजन किया। ऐसे में मैं नहीं समझता कि उनकी इसके लिए आलोचना होनी चाहिए।
सिंह ने मुंबई (फरवरी 2010) में राहुल द्वारा शिवसेना से निपटने के तरीके की प्रशंसा की। गैर मराठी लोगों पर हमला करने वालों को राहुल ने आड़े हाथ लिया और सार्वजनिक तौर पर कहा कि मुंबई सभी देशवासियों की है। वह निर्भीक होकर शेर की मांद में गए और सड़कों के अलावा वहाँ की लोकल ट्रेन में यात्रा की।
उनकी मुंबई यात्रा में शिव सेना के गुंडे पूरी तरह नाकाम साबित हुए और शायद ही कोई मराठी शिव सेना द्वारा राहुल के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुआ हो। राहुल और उनके सलाहकारों का यह काफी सुनयोजित कदम था।
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